क्रोध (Anger)- विनाश का संकेत | Krodh | Gussa
क्रोध (Anger)- विनाश का संकेत "दसो दिशा से क्रोध की उठि अपरबल आग शीतल संगत साध की तहां उबरिये भाग।" -->सम्पूर्ण संसार क्रोध की अग्नि से चतुर्दिक जल रहा है। यह आग अत्यंत प्रवल है। लेकिन संत साधु की संगति शीतल होती है जहा हम भाग कर बच सकते हैं। "A great fire has arisen of anger from all ten sides. The company of saint is very cool. wherein you can save yourself from the fire." क्रोध को हमारे शास्त्रों में विनाश का दूसरा रूप या कह सकते हैं कि विनाश का संकेत भी माना गया है, कहा जाता है कि जहां क्रोध होता है वहां खुशियां, धन और प्रेम जैसी चीजें कभी नहीं टिक सकती, कभी ना कभी इसका विनाश अवश्य होता है |हमारी ज़िन्दगी उस ईश्वर द्वारा , हमको दिया एक अनमोल तोहफा है, जिसमें अच्छा बुरा, छोटा बड़ा, खुशियां दुख, वैमनस्यता और क्रोध भी शामिल हैं, लेकिन हमें अपने जीवन में किन आदतों को अपनाना है तथा किन को खुद से दूर करना है, इस बात के चयन का अधिकार ईश्वर ने हमें ही दिया है | इसे कुछ इस तरह से समझये, मानों हम किसी बारूद के ढेर पर माचिस लिए खड़े हों, लेकिन ये चयन हमारा ही है कि ...