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माँ के लिए इससे सुन्दर लाइन कहीं नहीं पड़ीं होंगी | तुम याद आती हो माँ

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तुम याद आती हो माँ  माँ (maa): इस दुनिया में हमें उस ऊपरवाले का दिया सबसे नायाब तोहफा मां (maa)  ही है, उससे सुंदर, उससे अच्छा और बड़ा विशाल दिल एक एक माँ के अलावा और किसी का, हो ही नहीं सकता | स्वयं ईश्वर भी शायद इस बात से इनकार नहीं कर पाएं कि उसकी जगह एक माँ(maa) को अगर पूजा जाए, तो, वो भी उस ईश्वर को पूजने के बराबर या जैसा ही होगा | Image Credit- Pexels.com ये कहना गलत नहीं होगा कि जब ईश्वर ने इस श्रीष्टि को रचा होगा, तब अपनी व्यस्तता को देखते हुए उसे भी लगा होगा कि एक ईश्वर तो इस दुनिया में भी जरूरी है, तब जाकर उसने शायद माँ को बनाया होगा | लेकिन वो नहीं जानता था कि अगर वो माँ को बना देगा तो इस श्रीष्टि में उससे ज्यादा पूछ उस माँ (maa) की ही हो जाएगी, क्यूँकि मां का दिल बहुत विशाल है, और जिस के सर पर भी इसका हाथ रहेगा उसे निश्चित ही कामयाबी, बरकत और जन्नत नसीब होगी | तो अपनी उस ईश्वर रूपी माँ को नमन करते हैं और खुद को उसकी आँचल की छाया में सौंपकर, धन्य कर लेते हैं, तो चलिए आज एक लम्हा उस माँ के नाम करते हैं, उस माँ की गोद में अपने सर को रखकर सारी थकान दूर कर लेते हैं, ...

मोक्ष (moksha) क्या है | मोक्ष की परिभाषा

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मोक्ष (moksha) क्या है..!!  "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||" अर्थ-  हम त्रिनेत्र को पूजते हैं, जो सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं, जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं। Related:-   वैराग्य- एक शांतिपूर्ण जीवन ,  Lesson from Bhagwat Geeta ,  क्रोध (Anger) मोक्ष क्या है और हम मरने के उपरांत इसे क्यू पाना चाहते हैं, क्या किसी की मृत्यु के पश्चात यदि पंडितों को दक्षिणा, दान और भोजन कराया जाए तो ये मर चुके व्यक्ति को मोक्ष दे देगा, या फिर पंडितों द्वारा कराए गए यग्य और पूजा विधान से मरे हुए व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी | कहा जाता है कि जब कोई व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी आत्मा की  मोक्ष (moksha) की प्राप्ति के लिए उस व्यक्ति का शराद कराया जाता है उसके नाम का पिंड भी दिया जाता है और  उसके नाम से पूजा कराई जाती है ताकि उस व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष मिल सके | लेकिन आखिरकार ये मोक्ष है क्या, और इसे मरणोपरांत कैसे पाया जा स...

तुम क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाओगे- A lesson from Bhagwat Geeta

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तुम क्या लेकर आए थे  "नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥" अर्थ – भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, ये आत्मा अजर अमर होती है, इसे ना तो आग से जला सकते है, और ना ही पानी भिगो सकते है, ना ही हवा इसे सुखा सकती है  ना ही कोई अस्त्र शस्त्र इसे काट सकता हैं। ... और आत्मा कभी नही मर सकती है.  "तुम क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाओगे, खाली हाथ आए थे और खाली हाथ जाओगे [Tum Kya Lekar Aye The Aur Kya Lekar Jaaoge, Khali Haath Aye The Aur Khali Hath Jaooge"] ये समझना ज्यादा मुश्किल भी नहीं है, मृत्यु हमारे जीवन का एक ब्रह्म सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता है | हम इस धरती पर जन्म लेते हैं, Survive करते हैं, जीवन भर सांसारिक सुखों दुखों को भोगते हैं और फिर एक दिन इस धरती पर अपना सब कुछ छोड़ कर चले जाते हैं, यानी हम मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं और इस लोक से परलोक का सफर शुरू करते है  | लेकिन आखिरकार ये मृत्यु है क्या ये क्यों होती है और हम मरकर आखिर जाते कहाँ हैं | इन सब बातों का ज्ञान हमें हमारे धर्म शास्त्रों में मिलता है.  ...

क्रोध (Anger)- विनाश का संकेत | Krodh | Gussa

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क्रोध (Anger)- विनाश का संकेत  "दसो दिशा से क्रोध की उठि अपरबल आग शीतल संगत साध की तहां उबरिये भाग।" -->सम्पूर्ण संसार क्रोध की अग्नि से चतुर्दिक जल रहा है। यह आग अत्यंत प्रवल है। लेकिन संत साधु की संगति शीतल होती है जहा हम भाग कर बच सकते हैं। "A great fire has arisen of anger from all ten sides. The company of saint is very cool. wherein you can save yourself from the fire." क्रोध को हमारे शास्त्रों में विनाश का दूसरा रूप या कह सकते हैं कि विनाश का संकेत भी  माना गया है, कहा जाता है कि जहां क्रोध होता है वहां खुशियां, धन और प्रेम जैसी चीजें कभी नहीं टिक सकती, कभी ना कभी इसका विनाश अवश्य होता है |हमारी ज़िन्दगी उस ईश्वर द्वारा , हमको दिया एक अनमोल तोहफा है, जिसमें अच्छा बुरा, छोटा बड़ा, खुशियां दुख, वैमनस्यता और क्रोध भी शामिल हैं, लेकिन हमें अपने जीवन में किन आदतों को अपनाना है तथा किन को खुद से दूर करना है, इस बात के चयन का अधिकार ईश्वर ने हमें ही दिया है | इसे  कुछ इस तरह से समझये, मानों हम किसी बारूद के ढेर पर माचिस लिए खड़े हों, लेकिन ये चयन हमारा ही है कि ...

बराबर वाली खाली बेंच - A Love Story

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A Beautiful Love Story  [This post includes लव स्टोरी इन हिंदी रोमांटिक or love story in hindi heart touching or pyar ki story / pyar ki ek kahani/प्यार की कहानी ] आयशा जो कि एक मुस्लिम वृहद्द परिवार में जन्मी और एक छोटे से घर में पली बढ़ी लड़की है जिसकी बाहरवीं की परीक्षा पास करने के बाद डिग्री Collage में एडमिशन हुआ है, और वो अपने भविष्य के सपनों को अपने आँखों में भरकर चल पड़ी है. उन्हें सच करने का हौसला लिए, चूँकि पहला दिन था तो आयशा को इस नयी सी दुनिया में खुद को ढालना था, नए दोस्त बनाने थे और बहुत कुछ सीखना था, तो वो जाकर अपनी क्लास में बेंच पर बैठ गई और इंतज़ार करने लगी कि कोई लड़की उसकी बराबर वाली बेंच में आकर बैठ जाए ताकी अब तलक जो उसके मन में अकेलेपन का एक घना अंधेरा छाया हुआ है, वो जल्दी से छट जाए. इसी इन्तज़ार में वो बैठी रही और बाकी लोगों का आना जाना देखती रही यह सब लगातार बना रहा लेकिन उसके बराबर  वाली बेंच में कोई भी दूसरी लड़की आकर नहीं बैठी........ अब ये क्यू हुआ शायद ना ही आयशा जान पाई और ना ही कोई और क्यूँकि कोई और तो अब तलक आयशा की बराबर वाली बेंच में आकर बै...

वैराग्य- एक शांतिपूर्ण जीवन | Kya Hota Hai Vairagya Jeevan

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Vairagya Jeevan   "सत्संगत्वे निस्संगत्वं,निस्संगत्वे निर्मोहत्वं। निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं,निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तिः॥" भावार्थ : सत्संग से वैराग्य, वैराग्य से विवेक, विवेक से स्थिर तत्त्वज्ञान और तत्त्वज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है । हमारे सामने अक्सर कभी यह प्रश्न उठता है कि वैराग्य क्या है, क्या वैराग्य को पाया जा सकता है या फिर इसे कंट्रोल किया जा सकता है, या इसे योग सि्‍धधियों से जाना जा सकता है ऐसे ही की सारे  प्रश्न हमारे मन के सागर में अक्सर गोते खाते हुए डूब जाते हैं जिन्हें हम जान भी नहीं पाते | कोई भी व्यक्ति वैराग्य को पाने के लिए क्या करे, कि वो इसे पा सके,कई वर्षों पूर्व जब इस धरती पर प्रभु अवतार कायम था जहा सुख शांति उन्नति हमेशा रहती थी, यदि युद्ध भी हुआ तो वो धर्म की रक्षा के लिए हुआ करता था, जिसमें भी मान मर्यादा का उचित ध्यान रखा जाता था | कई लोग बरहम्चार्य का पालन भी करते थे और मोह माया का  त्याग भी देखने को मिलता था, मनुष्य वैरागी हो जाया करता था |  और जब जब मनुष्य उस परमात्मा की खोज में निकला है, जब जब उसने संसारिक सुखों का त्या...

मकर संक्रांति क्यो मनाते हैं | makar sankranti essay in hindi

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  Makar Sankranti Essay In Hindi (Is post me apko makar sankranti nibandh or makar sankranti par essay sath hi makar sankranti in hindi 2022 ke bare me jaankari di gayi hai.) मकर सक्रांति (makar sankranti) हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यह त्यौहार सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। यह त्यौहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन कभी-कभी यह तारीक एक दिन पहले 13 जनवरी या एक दिन बाद 15 जनवरी भी हो जाती है लेकिन ऐसा कम ही होता है। जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से गुजरता है, तब यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने और बनाने का विशेष महत्त्व है।  मकर सक्रांति का अर्थ [makar sankranti meaning]: मकर सक्रांति का त्यौहार हिन्दुओं के लिए बहुत खास त्यौहार होता है। मकर सक्रांति के त्यौहार का सीधा सम्बन्ध पृथ्वी के भूगोल तथा सूर्य की स्थिति से है। जब सूर्य की स्थिति मकर रेखा पर होती है उसी दिन मकर सक्रांति होती है और यह दिन अधिकतर 14 जनवरी को होता है। मकर सक्रांति के दिन तिल और गुड़ लगाकर नर्मदा में स्नान करना लाभदायी होता है। इसके बाद गुड़, ...

17 अनमोल और प्रेरणादायक विचार हिंदी में | सुविचार इन हिंदी With Images

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17 अनमोल और प्रेरणादायक विचार  आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए सबसे बेस्ट अनमोल वचन इन हिंदी लेकर आये हैं। ये प्रेरणादायक अनमोल वचन या सुविचार इन हिंदी आपक एक नयी सोच और जीवन को समझने का अलग नज़रिया देंगे। इस पोस्ट में 17 उत्साहवर्धक विचार या नये अनमोल विचार आपको इमेजेज के साथ मिलेंगे। इस अनमोल विचार को आप रोज पड़ें और अपने इन प्रेरणादायक अनमोल वचन या फिर प्रेरणादायक विचार स्टेटस को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।  So below are the 17 best Anmol Prernadayak Suvichar in hindi with images- Suvichar 1- "Samjhdar vykti apni samjhdari ki wajah se chup ho jaata hai aur murkh ko lgta hai ki mere dar ki wajah se chup ho gya." suvichar image-1 Suvichar 2-   "Musafir kal bhi tha, Musafir aaj bhi hun; kal apno ki talaash me tha, Aj apni talaash me hun." suvichar image-2 Suvichar 3-   "Jindagi ko asaan nahi bas khud ko majboot bnaana pdta hai. Sahi samay kabhi nahi aata bas samay ko sahi bnaana pdta hai." suvichar image-3 Suvichar 4-   "Bhari hui jeb aapko kayi...

एवेरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा की प्रेरणादायक कहानी

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  Life Story of Arunima Sinha एवेरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा की प्रेरणादायक कहानी (arunima sinha life story): आमतौर पर जब इंसान को थोड़ी सी भी चोट लग जाती है तो वह इंसान परेशान हो जाता है। लेकिन जरा सोचो जिसका एक पैर कृत्रिम हो और फिर भी वो दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवेरेस्ट को फ़तेह कर दे। शायद आपको यकिन नहीं हो रहा होगा लेकिन ये सच है।  आज आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने न सिर्फ माउंट एवेरेस्ट जैसी चोटी को फ़तेह किया बल्कि दुनिया के सात महद्वीपों के ऊँचे शिखर को भी फ़तेह किया। आप सोच सकते हैं कि एक शारीरिक स्वस्थ इंसान के लिए भी एवेरेस्ट चढ़ना बहुत कठिन है तो एक पैर खोने के बाद किसी महिला के लिए एक कृत्रिम पैर से एवेरेस्ट पर चढ़ना मानो असंभव सा लगता है। लेकिन यह एक ऐसी नायिका है, जिसने भारत का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया। उस महान नायिका का नाम है 'अरुणिमा सिन्हा' . अरुणिमा सिन्हा प्रारम्भिक जीवन (arunima sinha early life):  Arunima Sinha का जन्म 20 जुलाई 1988 को जिला अम्बेडकरनगर लखनऊ में हुआ। उनके पिता आर्मी में इंजीनियर थे और माँ हेल्थ डिपार्टमेंट...